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"आमंत्रण" ---- `बालसभा’ एक अभियान है जो भारतीय बच्चों के लिए नेट पर स्वस्थ सामग्री व जीवनमूल्यों की शिक्षा हिन्दी में देने के प्रति प्रतिबद्ध है.ताकि नेट पर सर्फ़िंग करती हमारी भावी पीढ़ी को अपनी संस्कृति, साहित्य व मानवीयमूल्यों की समझ भी इस संसाधन के माध्यम से प्राप्त हो व वे केवल उत्पाती खेलों व उत्तेजक सामग्री तक ही सीमित न रहें.कोई भी इस अभियान का हिस्सा बन सकता है, जो भारतीय साहित्य से सम्बन्धित सामग्री को यूनिकोड में टंकित करके ‘बालसभा’ को उपलब्ध कराए। इसमें महापुरुषों की जीवनियाँ, कथा साहित्य व हमारा क्लासिक गद्य-पद्य सम्मिलित है ( जैसे पंचतंत्र, कथा सरित्सागर, हितोपदेश इत्यादि).

Friday, February 20, 2009

फेसबुक, माइस्पेस से कैंसर का खतरा



फेसबुक, माइस्पेस से कैंसर का खतरा


लंदन

क्या आप फेसबुक या माइस्पेस जैसी सोशल नेटवर्किंग साइट का ज्यादा इस्तेमाल करते हैं? यदि हां, तो आपके लि एक बुरी खबर है। इन वेबसाइटों के ज्यादा उपयोग से कैंसर और डिमेंशिया जैसे खतरनाक रोगों के साथ-सा हृदसंबंधी बीमारियां का खतरा बढ़ सकता है। एक विज्ञान पत्रिका में यह दावा किया गया

है।


मनोचिकित्सक एरिक सिग्मैन ने 'बायलाजिस्ट' नाम के शोधपत्र में लिखा है, 'लोगों से मिलने के बजाय नेट पर घंटों बातचीत करने का सेहत पर घातक असर पड़ सकता है।' एरिक के हवाले से डेली मेल ने कहा, 'कैंसर, डिमेंशिया और हृदय रोग जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा काफी बढ़ जाता है। अकेलेपन का रोग प्रतिरोधक क्षमता, हार्मोन के स्तर व धमनियों के कार्य करने पर असर पड़ता है। मानसिक क्षमता भी प्रभावित हो सकती है।'


सिग्मैन ने कहा कि हालांकि ये साइटें आपसी संपर्को को बढ़ाने के उद्देश्य से बनाई गईं। लेकिन ये लोगों का एकाकीपन बढ़ा रही हैं। शोध बताते हैं कि 1987 से अब तक मिल बैठकर बातचीत करने के घंटों में काफी कमी आई है।


सिग्मैन ने कहा कि संबंधों को बढ़ावा देने के लिए जिम्मेदार हार्मोन आक्सीटासिन लोगों के सामने होने और नहीं होने पर अलग-अलग ढंग से स्रावित होता है। उन्होंने कहा, 'नेटवर्किंग साइटों को हमारे सामाजिक जीवन में इजाफा करना चाहिए। लेकिन अध्ययन में विपरीत परिणाम देखने को मिले।' उन्होंने कहा कि शोध में नेटवर्किंग साइटों से प्रभावित 209 तरह के जीन की पहचान की गई। इनमें प्रतिरोधक क्षमता को प्रभावित करने वाले और तनाव को नियंत्रित करने वाले जीन शामिल हैं।

(जागरण )



2 comments:

प्रदीप मानोरिया said...

सहज सरल रोचक मेरे ब्लॉग पर पधार कर "सुख" की पड़ताल को देखें पढ़ें आपका स्वागत है
http://manoria.blogspot.com

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आपका एक-एक सार्थक शब्द इस अभियान व प्रयास को बल देगा. मर्यादा व संतुलन, विवेक के पर्याय हैं और उनकी सराहना के शब्द मेरे पास नहीं हैं;पुनरपि उनका सत्कार करती हूँ|आपके प्रतिक्रिया करने के प्रति आभार व्यक्त करना मेरा नैतिक दायित्व ही नहीं अपितु प्रसन्नता का कारण भी है|पुन: स्वागत कर हर्ष होगा| आपकी प्रतिक्रियाएँ मेरे लिए महत्वपूर्ण हैं।

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