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"आमंत्रण" ---- `बालसभा’ एक अभियान है जो भारतीय बच्चों के लिए नेट पर स्वस्थ सामग्री व जीवनमूल्यों की शिक्षा हिन्दी में देने के प्रति प्रतिबद्ध है.ताकि नेट पर सर्फ़िंग करती हमारी भावी पीढ़ी को अपनी संस्कृति, साहित्य व मानवीयमूल्यों की समझ भी इस संसाधन के माध्यम से प्राप्त हो व वे केवल उत्पाती खेलों व उत्तेजक सामग्री तक ही सीमित न रहें.कोई भी इस अभियान का हिस्सा बन सकता है, जो भारतीय साहित्य से सम्बन्धित सामग्री को यूनिकोड में टंकित करके ‘बालसभा’ को उपलब्ध कराए। इसमें महापुरुषों की जीवनियाँ, कथा साहित्य व हमारा क्लासिक गद्य-पद्य सम्मिलित है ( जैसे पंचतंत्र, कथा सरित्सागर, हितोपदेश इत्यादि).

Tuesday, December 29, 2009

हिमपात : कैलिफ़ोर्निया में टाहो झील के किनारे

एक बालगीत

हिमपात 
कैलिफ़ोर्निया में टाहो झील के किनारे

शकुन्तला बहादुर





http://thestormking.com/tahoe_nuggets/Nugget_172/Nugget__172_A_April_23_Snowfall.jpg



ऊँचे पर्वत पर हम आए ।
मन में हैं खुशियाँ भर लाए।।

पाइन के हैं वृक्ष बड़े ।
सीधे हैं प्रहरी से खड़े।।

देखो झरती कैसे झर झऱ।
गिरती जाती बर्फ़ निरन्तर।।

बरस रही है सभी तरफ़।
दुग्ध-धवल सी दिखे बरफ़।।

आज हुआ कैसा हिमपात।
ढक गइ धरा, ढके तरुपात।।

ऐसा लगे शीत के भय से।
सूरज भी न निकला घर से।।

बादल की वह ओढ़ रज़ाई।
बिस्तर में छिप लेटा भाई।।

हैं मकान सब ढके बर्फ़ से।
बन्द रास्ते हुए बर्फ़ से ।।

देखो बाहर ज़रा निकलकर ।
चलो बर्फ़ में सँभल सँभल कर।।

बरफ़ थपेड़े दे गालों पर।
जूतों में गल जाए पिघलकर।।

ऊँचे कोमल बर्फ़ के गद्दे।
बिछे हुए हैं इस भू पर।।

मन करता है उन पर लोटें।
बच्चों के संग हिलमिल कर।।

बर्फ़ के लड्डू बना बना कर।
बालक खेलें खुश हो हो कर।।

मारें इक दूजे को हँस कर।
फिर भागें किलकारी भर कर।।

और कभी मन होता ऐसा।
बचपन में देखा था जैसा।।

बर्फ़ का चूरा हाथ में लेकर।
उस पर शर्बत लाल डाल कर।।

चुस्की लेकर उसको खाएँ।
घिसी बरफ़ का लुत्फ़ उठाएँ।।

दृश्य मनोरम बड़ा यहाँ है।
अपना मन खो गया यहाँ है।।

** ** ** **

3 comments:

Udan Tashtari said...

यह अत्यंत हर्ष का विषय है कि आप हिंदी में सार्थक लेखन कर रहे हैं।

हिन्दी के प्रसार एवं प्रचार में आपका योगदान सराहनीय है.

मेरी शुभकामनाएँ आपके साथ हैं.

नववर्ष में संकल्प लें कि आप नए लोगों को जोड़ेंगे एवं पुरानों को प्रोत्साहित करेंगे - यही हिंदी की सच्ची सेवा है।

निवेदन है कि नए लोगों को जोड़ें एवं पुरानों को प्रोत्साहित करें - यही हिंदी की सच्ची सेवा है।

वर्ष २०१० मे हर माह एक नया हिंदी चिट्ठा किसी नए व्यक्ति से भी शुरू करवाएँ और हिंदी चिट्ठों की संख्या बढ़ाने और विविधता प्रदान करने में योगदान करें।

आपका साधुवाद!!

नववर्ष की अनेक शुभकामनाएँ!

समीर लाल
उड़न तश्तरी

Vimla Bhandari said...

आज मुझे आपके Blog पर आकर अपार प्रसन्नता हुई. प्राकृतिक बिम्बो से भरपूर बाल कविता के लिए बधाई. आपने तो टाहो झील की सैर ही करा दी. यहां India में हमने भी हिमपात देख लिया.

cmpershad said...

बढिया चित्र और कविता में जीवंत चित्रण के लिए बधाई॥

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आपका एक-एक सार्थक शब्द इस अभियान व प्रयास को बल देगा. मर्यादा व संतुलन, विवेक के पर्याय हैं और उनकी सराहना के शब्द मेरे पास नहीं हैं;पुनरपि उनका सत्कार करती हूँ|आपके प्रतिक्रिया करने के प्रति आभार व्यक्त करना मेरा नैतिक दायित्व ही नहीं अपितु प्रसन्नता का कारण भी है|पुन: स्वागत कर हर्ष होगा| आपकी प्रतिक्रियाएँ मेरे लिए महत्वपूर्ण हैं।

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