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"आमंत्रण" ---- `बालसभा’ एक अभियान है जो भारतीय बच्चों के लिए नेट पर स्वस्थ सामग्री व जीवनमूल्यों की शिक्षा हिन्दी में देने के प्रति प्रतिबद्ध है.ताकि नेट पर सर्फ़िंग करती हमारी भावी पीढ़ी को अपनी संस्कृति, साहित्य व मानवीयमूल्यों की समझ भी इस संसाधन के माध्यम से प्राप्त हो व वे केवल उत्पाती खेलों व उत्तेजक सामग्री तक ही सीमित न रहें.कोई भी इस अभियान का हिस्सा बन सकता है, जो भारतीय साहित्य से सम्बन्धित सामग्री को यूनिकोड में टंकित करके ‘बालसभा’ को उपलब्ध कराए। इसमें महापुरुषों की जीवनियाँ, कथा साहित्य व हमारा क्लासिक गद्य-पद्य सम्मिलित है ( जैसे पंचतंत्र, कथा सरित्सागर, हितोपदेश इत्यादि).

Wednesday, June 29, 2011

बच्चों का सम्मान



प्रकाशन विभाग
सूचना और प्रसारण मंत्रालय
भारत सरकार

देश भर के 13 स्कूली बच्चों को बाल भारती निबंध प्रतियोगिता पुरस्कार


नई दिल्ली, मंगलवार, 28 जून



देश भर के 13 स्कूली बच्चों को बाल भारती निबंध प्रतियोगिता-2010 के पुरस्कार दिए गए। प्रथम पुरस्कार के लिए दिल्ली के मोहम्मद साकिब खान, दूसरे पुरस्कार के लिए गुड़गाँव  की सविता और तीसरे पुरस्कार के लिए दिल्ली की ही गौरी श्रीवास्तव के निबंधों को चुना गया। अन्य 10 बच्चों को प्रोत्साहन पुरस्कार दिए गए। ये हैं- पूर्वा, प्रियम स्नेह, चारुता गुप्ता, ऋषभ गर्ग, सौहार्द डोभाल, राजा विक्रम, मो. अनस ‘राजा’, कु. उमा देवी, दुष्यंत कुमार फेकर और शुभम तिवारी


सभी विजेता बच्चों को प्रमाण पत्रों के साथ पुरस्कार राशि भी दी गई। ये पुरस्कार, कार्यक्रम में मुख्य अतिथि सलाम बालक ट्रस्ट की अध्यक्ष श्रीमती प्रवीण नायर ने दिए। तेरह विजेता बच्चों में सोनभद्र, लखीमपुर खीरी (उत्तर प्रदेश), सीवान (बिहार), दुर्ग (छत्तीसगढ़), उत्तरकाशी (उत्तराखंड), टोंक (राजस्थान), पटना (बिहार), भोपाल (मध्य प्रदेश), रांची (झारखंड) जैसे दूर शहरों के प्रतियोगी भी शामिल हैं। सूचना और प्रसारण मंत्रालय में संयुक्त सचिव (नीति एवं प्रशासन) श्री खुर्शीद अहमद गनई समारोह में विशेष अतिथि थे।



बाल दिवस के मौके पर राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित होने वाली इस प्रतियोगिता में इस बार विषय रखा गया था- 'बढ़ते लोग, घटता पानी'। देश भर के करीब एक हजार स्कूली बच्चों ने इसमें भाग लिया। निबंधों का मूल्यांकन भाषा, अभिव्यक्ति और प्रस्तुति के आधार पर किया गया।



विशिष्ट अतिथि श्री गनई ने कहा कि तकनीकी विकास का पढ़ने की अभिरुचि पर बुरा असर नहीं पड़ने देना चाहिए, बल्कि तकनीक को इसे बढ़ावा देने का औजार ही बना लेना चाहिए। साथ ही उन्होंने कहा कि अब तकनीक से दूर रहने का कोई औचित्य नहीं है।


दूरदर्शन न्यूज के महानिदेशक समाचार, श्री एस एम खान भी इस अवसर पर उपस्थित थे।


कार्यक्रम में अतिथियों का स्वागत प्रकाशन विभाग की अपर महानिदेशक श्रीमती अरविंद मंजीत सिंह ने किया। उन्होंने बताया कि बालभारती की प्रसार संख्या डेढ़ लाख से ज्यादा है। पिछले 63 वर्षों से लगातार प्रकाशित हो रही `बाल भारती' मनोरंजक और ज्ञानवर्धक के साथ ही यह पत्रिका बच्चों और किशोरों की प्रतिभा के विकास के लिए रचनात्मक अभियान भी चलाती रहती है।। वार्षिक निबंध और नियमित चित्रकला प्रतियोगिताएँ और दूसरी गतिविधियाँ इसी अभियान का हिस्सा हैं जो बच्चों को राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भागीदारी की प्रेरणा देती हैं। इसमें पाठकों की सक्रिय भागीदारी बढ़ाने की कोशिशें लगातार जारी हैं। बदलते समय के साथ पत्रिका का कलेवर, प्रस्तुतीकरण भी बदला है। फिर भी पत्रिका की कीमत सिर्फ आठ रुपए है।


सूचना और प्रसारण मंत्रालय के गीत एवं नाटक प्रभाग ने इस अवसर पर बच्चों की रुचि के अनुरूप सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किया।


बाल भारती पत्रिका के वरिष्ठ संपादक श्री वेदपाल ने कार्यक्रम में धन्यवाद ज्ञापन किया।


बालभारती के अलावा, हर वर्ग और और भाषा-भाषी के लिए किफायती दरों पर पठनीय सामग्री उपलब्ध कराने के उद्देश्य के साथ प्रकाशन विभाग हर माह 13 भारतीय भाषाओं में कुल 18 पत्रिकाएँ छापता है। राष्ट्रीय विकास को दर्शाती 'योजना' पत्रिका 13 भाषाओं में निकलती है। इसके अलावा विभाग हिंदी और अंग्रेजी में ग्रामीण विकास की पत्रिका 'कुरुक्षेत्र', तथा हिंदी, और उर्दू में साहित्यिक पत्रिका 'आजकल’ का प्रकाशन भी करता है। रोजगार समाचार (हिंदी और उर्दू) तथा एंप्लॉयमेंट न्यूज (अंग्रेजी) इसके विशिष्ट पाक्षिक हैं जो बेहतर रोजगार चुनने और पाने में युवाओं का मार्गदर्शन करते हैं।

2 comments:

surendrshuklabhramar5 said...

सभी बच्चों उनके अभिभावकों और गुरु वृन्द को बधाई आप को भी -सुन्दर प्रयास और जानकारी देने के लिए
शुक्ल भ्रमर ५
बाल झरोखा सत्यम की दुनिया

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आपका एक-एक सार्थक शब्द इस अभियान व प्रयास को बल देगा. मर्यादा व संतुलन, विवेक के पर्याय हैं और उनकी सराहना के शब्द मेरे पास नहीं हैं;पुनरपि उनका सत्कार करती हूँ|आपके प्रतिक्रिया करने के प्रति आभार व्यक्त करना मेरा नैतिक दायित्व ही नहीं अपितु प्रसन्नता का कारण भी है|पुन: स्वागत कर हर्ष होगा| आपकी प्रतिक्रियाएँ मेरे लिए महत्वपूर्ण हैं।

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