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Friday, July 30, 2010

आसमान में कितने तारे?










मौलिक विज्ञान लेखन 




आसमान में कितने तारे ?
विश्वमोहन तिवारी


प्राक्कथन


आज का युग विज्ञान और प्रौद्योगिकी का है। यदि हम चाहते हैं कि हमारा देश विश्व में सम्मान से रहे और समृद्ध रहे तब हमें विज्ञान (इसमें प्रौद्योगिकी सम्मिलित है) में दक्षता प्राप्त करनी ही होगी। और यदि हम सचमुच में वैज्ञानिक सोच समझ पैदा करना चाहते हैं तब यह शिक्षा विकसित मातृभाषा में होना चाहिये ।

यह हमें आज के पेचीदे जीवन को समझने में भी मदद करेगी, ताकि विज्ञान और प्रौद्योगिकी हमारे नियंत्रण में रहें, न कि हमें गुलाम बनाएँ।

आकाश के तारों को देखकर हम सभी का मन अचम्भित होता है, आह्लादित होता है और प्रश्न करता है।

विज्ञान की एक परिभाषा प्राकृतिक घटनाओं पर क्या, क्यों, कैसे, कहाँ, कब प्रश्नों के उत्तर है। कभी आपने गौर किया है कि बच्चे ऐसी ही शैली में प्रश्न करते हैं। अर्थात् वैज्ञानिक दृष्टिकोण मानव का जन्मसिद्ध अधिकार है। इस लेखमाला में खगोल विषय पर कुछ ऐसे ही प्रश्नों के उत्तर हैं, और कुछ प्रश्न भी।


विश्व मोहन तिवारी
एयर वाइस मार्शल (से. नि.)



एक सत्य घटना :


सन १९७२ या ७३ की‌ बात है। पटना में दो दिन में दो बार भूकम्प आया था, और दूसरे भूकम्प की रात में आने की चेतावनी दी गई थी। बड़ों की बातें सुनने के बाद कोई ५ या ६ वर्ष के बालक ने अपनी माँ से कहा, "माँ जब भूकम्प आएगा, तब मुझे जगा देना।” जब माँ ने पूछा क्यों, तब उसने कहा, “ जब भूकम्प आएगा, तब बहुत सारे तारे भी टूटकर गिरेंगे। मैं उऩ्हें बटोर लूँगा।"

. . . . . . . . . . 


आसमान में कितने तारे



अकबर ने बीरबल से भी यही प्रश्न पूछा था। बीरबल ने समय माँगा और नाटक करने के बाद कोई बहुत बड़ी संख्या बतला दी। अकबर ने कहा कि वे तारे गिनवाएँगे, और उत्तरों की संख्या में अन्तर मिला तो बीरबल की खैर नहीं। बीरबल ने अपनी शैली में उत्तर दिया, “हुज़ूर, कुछ अंतर तो आ सकता है क्योंकि रोजाना अनेक तारे टूटते हैं। और हुज़ूर चाहें तो गिनती करवा सकते हैं।" अकबर बीरबल के इस उत्तर से खुश हो गए।



आज कोई भी ऐसे उत्तर से संतुष्ट नहीं होगा। क्योंकि यह वैज्ञानिक युग है। कोई भी कथन या परिकल्पना या निष्कर्ष या सिद्धान्त तब तक वैज्ञानिक नहीं माना जा सकता जबतक उसे जाँचने परखने की संभावना न हो । बीरबल को मालूम था कि उनके उत्तर को जाँचा या परखा नहीं जा सकता था, और वास्तव में यही उनका संदेश था।



विश्वसनीयता के लिये उत्तर वैज्ञानिक पद्धति से निकालना आवश्यक होता है। ऐसे प्रश्नों के उत्तर निकालने के लिये अवलोकन करना आवश्यक है, और तत्पश्चात अनुमान करना पड़ता है, क्योंकि खरबों तारों की गिनती बदलते वातावरण में तो असंभव है। वैज्ञानिक पद्धति में अनुमानों का उपयोग किया जाता है। अनुमान करने का भी वैज्ञानिक आधार होना चाहिये । फ़िर अनेक वैज्ञानिक स्वतंत्र रूप से वही कार्य करते हैं और जब सभी वैज्ञानिकों के उत्तर लगभग एक से मिलते हैं तब वह अनुमान विश्वसनीय होता है, और साथ ही उस अनुमान को कभी भी चुनौती के लिये तैयार रहना होता है। हम वैज्ञानिकों से यही अपेक्षा करते हैं और इसलिये उन पर विश्वास करते हैं।



जितने तारे हमें दिखते हैं, क्या आकाश में उतने ही तारे हैं? एक तो हमारा आँखों से देखना हुआ, और दूसरा, दूरदर्शियों की सहायता से देखना। और तीसरा, गणित के नियमों से 'देखना', जैसे नैप्टियून को पहले गणितज्ञों ने 'देखा' था; ऐसे देखने को भी अनुमान कहते हैं। वैज्ञानिकों का अनुमान है कि ऐसे स्थान से जहाँ अमावस्या की रात्रि में कोई शहरी उजाला न हो, निर्मल आकाश में स्वस्थ्य आँखों से हमें लगभग ३००० तारे दिखते हैं। दूरदर्शियों से दिखने वाले तारों की संख्या दूरदर्शी की शक्ति के अनुसार बढ़ती जाती है। क्या तारों की संख्या अनंत है? यदि ब्रह्माण्ड अनंत है तब भी सितारों की संख्या अनंत नहीं हो सकती, क्योंकि तब अनंत द्रव्य या ऊर्जा की आवश्यकता होगी। महान विस्फ़ोट के समय अनंत द्रव्य या ऊर्जा नहीं थी। वैसे, ब्रह्माण्ड भी अनंत नहीं हो सकता क्योंकि उसका तो प्रसार हो रहा है और उसका अभ्युदय एक निश्चित समय पहले हुआ था। हम कह सकते हैं कि उसकी त्रिज्या लगभग १३.५ प्रकाश वर्ष है।


मोटे तौर पर हमारी मंदाकिनी (गैलैक्सी) आकाश गंगा (मिल्की वे) में लगभग २०० अरब तारे हैं। अभी ताजे समाचारों के आधार पर आकाश गंगा में ४०० अरब तारे हैं। देखिये, वैज्ञानिकों के लिये भी कितना कठिन है विश्वसनीय अनुमान लगाना। किन्तु वैज्ञानिक हमेशा तैयार रहते हैं परखने के लिये और अपने विचार या निष्कर्ष बदलने के लिये । और हमारी पड़ोसन एन्ड्रोमिडा में‌ १००० अरब तारे हैं। अभी तक हब्बल जैसे संवेदनशील दूरदर्शी(टैलैस्कोप)से लगभग ५० अरब मंदाकिनियाँ देख सकते हैं। अब आप स्वयं अनुमान लगा सकते हैं कि आसमान में कितने तारे हैं !


क्रमशः 


2 comments:

ऋषभ Rishabha said...

इस अत्यंत उपादेय, सूचनाप्रद और रोचक लेखमाला के स्वागत के साथ लेखक और चिट्ठाकार का अभिनंदन!

प्रतिपादन शैली की सहजता के लिए विशेष साधुवाद. कृपया इसे बनाए रखें.

>ऋ.

Rahul Singh said...

विषय में प्रवेश, शुरुआत जिस तरह से हुई है वह लाजवाब है, लेख बढ़ते हुए तो उपयोगी, सूचनात्‍मक है ही, आगे प्रतीक्षा रहेगी.

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आपका एक-एक सार्थक शब्द इस अभियान व प्रयास को बल देगा. मर्यादा व संतुलन, विवेक के पर्याय हैं और उनकी सराहना के शब्द मेरे पास नहीं हैं;पुनरपि उनका सत्कार करती हूँ|आपके प्रतिक्रिया करने के प्रति आभार व्यक्त करना मेरा नैतिक दायित्व ही नहीं अपितु प्रसन्नता का कारण भी है|पुन: स्वागत कर हर्ष होगा| आपकी प्रतिक्रियाएँ मेरे लिए महत्वपूर्ण हैं।

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