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"आमंत्रण" ---- `बालसभा’ एक अभियान है जो भारतीय बच्चों के लिए नेट पर स्वस्थ सामग्री व जीवनमूल्यों की शिक्षा हिन्दी में देने के प्रति प्रतिबद्ध है.ताकि नेट पर सर्फ़िंग करती हमारी भावी पीढ़ी को अपनी संस्कृति, साहित्य व मानवीयमूल्यों की समझ भी इस संसाधन के माध्यम से प्राप्त हो व वे केवल उत्पाती खेलों व उत्तेजक सामग्री तक ही सीमित न रहें.कोई भी इस अभियान का हिस्सा बन सकता है, जो भारतीय साहित्य से सम्बन्धित सामग्री को यूनिकोड में टंकित करके ‘बालसभा’ को उपलब्ध कराए। इसमें महापुरुषों की जीवनियाँ, कथा साहित्य व हमारा क्लासिक गद्य-पद्य सम्मिलित है ( जैसे पंचतंत्र, कथा सरित्सागर, हितोपदेश इत्यादि).

Saturday, September 4, 2010

है समय नदी की बाढ़ कि जिसमें सब बह जाया करते हैं




  नेताजी सुभाषचन्द्र बोस

कवि श्री गोपालप्रसाद व्यास 


***



Netaji Subhash Chandra Bose 


है समय नदी की बाढ़ कि जिसमें सब बह जाया करते हैं।
है समय बड़ा तूफ़ान प्रबल पर्वत झुक जाया करते हैं ।।
अक्सर दुनियाँ के लोग समय में चक्कर खाया करते हैं।
लेकिन कुछ ऐसे होते हैं, इतिहास बनाया करते हैं ।।

             
             यह उसी वीर इतिहास-पुरुष की अनुपम अमर कहानी है।
             जो रक्त कणों से लिखी गई, जिसकी जयहिन्द निशानी है।।
             प्यारा सुभाष, नेता सुभाष, भारत-भू का उजियारा था ।  
             पैदा होते ही गणिकों ने जिसका भविष्य लिख डाला था।।


यह वीर चक्रवर्ती होगा, या त्यागी होगा सन्यासी।
जिसके गौरव को याद रखेंगे, युग युग तक भारतवासी।।
सो वही वीर नौकरशाही ने,पकड़ जेल में डाला था ।
पर क्रुद्ध केहरी कभी नहीं फंदे में टिकने वाला था।।


              बाँधे जाते इंसान, कभी तूफ़ान न बाँधे जाते हैं।
              काया ज़रूर बाँधी जाती, बाँधे न इरादे जाते हैं।।
           वह दृढ़-प्रतिज्ञ सेनानी था, जो मौका पाकर निकल गया।
           वह पारा था अंग्रेज़ों की मुट्ठी में आकर फिसल  गया।।


जिस तरह धूर्त दुर्योधन से, बचकर यदुनन्दन आए थे।
जिस तरह शिवाजी ने मुग़लों के, पहरेदार छकाए थे ।।
बस उसी तरह  यह तोड़ पींजरा, तोता-सा बेदाग़ गया। 
जनवरी माह सन् इकतालिस,मच गया शोर वह भाग गया।।


            वे कहाँ गए, वे कहाँ रहे, ये धूमिल अभी कहानी है।
            हमने तो उसकी नयी कथा, आज़ाद फ़ौज से जानी है।। 



12 comments:

girish pankaj said...

bahut pahale parhee thee yah kavitaa. fir se parh kar achchha lagaa. jaise us din baat kar ke lagaa thaa.

काजल कुमार Kajal Kumar said...

आज a फार एप्पल के दौर में मुझे नहीं लगता कि नयी पीढ़ी इस तरह की कवितायेँ पढ़ पायेगी, अफ़सोस होता है.

cmpershad said...

इतिहास से ऐसे महापुरुषों के नाम मिटाने की साजिश भी हो रही है !!

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) said...

सचमुच, आपकी पोस्ट बहुत बढ़िया है।
--
इसकी चर्चा बाल चर्चा मंच पर भी है!
http://mayankkhatima.blogspot.com/2010/09/16.html

चैतन्य शर्मा said...

कविता आंटी.... मैंने तो पहली बार नेताजी के बारे में इतनी सुंदर कविता पढ़ी है..... आपका धन्यवाद इस प्यारी कविता के लिए.....

हेमंत कुमार ♠ Hemant Kumar said...

नेता जी पर लिखी गयी सुन्दर और सन्देश परक रचना----।

shiva said...

आज पहली बार आपके ब्लॉग पर आया हूँ बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति ......
कभी हमारे ब्लॉग पर भी आए //shiva12877.blogspot.com

shiva said...

बहुत सुंदर कविता
कभी समय निकालकर //shiva12877.blogspot.com ब्लॉग पर भी अपनी एक दृष्टी डालें .

Surendrashukla" Bhramar" said...

डॉ कविता जी बहुत सुन्दर रचना नेता जी पर लिखी हुयी निम्न पंक्ति बहुत सुन्दर बन पड़ी है
बांधे जाते इंसान कभी तूफान न बांधे जाते हैं
नेता जी का किया धरा हम आज कैसे भूल सकते हैं ...
बधाई हो

रुद्रांश दूबे said...

namste kvita aanti achhi kavita likhii hai aapne subhashhchandr vos par mai bhi unhe pasnd krta huu.

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आपका एक-एक सार्थक शब्द इस अभियान व प्रयास को बल देगा. मर्यादा व संतुलन, विवेक के पर्याय हैं और उनकी सराहना के शब्द मेरे पास नहीं हैं;पुनरपि उनका सत्कार करती हूँ|आपके प्रतिक्रिया करने के प्रति आभार व्यक्त करना मेरा नैतिक दायित्व ही नहीं अपितु प्रसन्नता का कारण भी है|पुन: स्वागत कर हर्ष होगा| आपकी प्रतिक्रियाएँ मेरे लिए महत्वपूर्ण हैं।

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