Subscribe

RSS Feed (xml)

"आमंत्रण" ---- `बालसभा’ एक अभियान है जो भारतीय बच्चों के लिए नेट पर स्वस्थ सामग्री व जीवनमूल्यों की शिक्षा हिन्दी में देने के प्रति प्रतिबद्ध है.ताकि नेट पर सर्फ़िंग करती हमारी भावी पीढ़ी को अपनी संस्कृति, साहित्य व मानवीयमूल्यों की समझ भी इस संसाधन के माध्यम से प्राप्त हो व वे केवल उत्पाती खेलों व उत्तेजक सामग्री तक ही सीमित न रहें.कोई भी इस अभियान का हिस्सा बन सकता है, जो भारतीय साहित्य से सम्बन्धित सामग्री को यूनिकोड में टंकित करके ‘बालसभा’ को उपलब्ध कराए। इसमें महापुरुषों की जीवनियाँ, कथा साहित्य व हमारा क्लासिक गद्य-पद्य सम्मिलित है ( जैसे पंचतंत्र, कथा सरित्सागर, हितोपदेश इत्यादि).

सोमवार, 28 जुलाई 2008

यह क्या कि कलाई में पहना दी .....



मैत्री


यह क्या कि कलाई में पहना दी
फ्रेंडशिप-बैंड
और समझ लिया, हो गई मैत्री पूरी?

मित्रता सबसे बड़ा धर्मं है.
छल भी उचित है
मित्रता की रक्षा के लिए.
राम ने वृक्ष की ओट से
बालि को मारा-मित्र को बचाना था न!
कृष्ण ने कसम तोड़कर
भीष्म पर हथियार उठाया
-मित्र को बचाना था न!

मित्रता सचमुच
सबसे बड़ा धर्मं है।
- ऋषभ देव शर्मा

मंगलवार, 22 जुलाई 2008

समय



समय


कहते हैं, कभी अर्जुन ने

कृष्ण का विराट रूप देखकर

पूछा था आश्चर्य से-

कौन हो तुम? तुम कौन हो?


कृष्ण ने मुस्करा कर कहा था-

मैं समय हूँ, पार्थ! मैं काल हूँ!



जो था, जो है, जो होगा

सब समय है, सब ईश्वर है।

वह साथ हो

तो अर्जुन जीत जाता है महाभारत।

वह साथ न हो तो

अर्जुन- वही अर्जुन-

हार जाता है साधारण भीलों से.



हे समय!

तू सचमुच बलवान है।

तुझे प्रणाम।

- ऋषभ देव शर्मा

Related Posts with Thumbnails