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"आमंत्रण" ---- `बालसभा’ एक अभियान है जो भारतीय बच्चों के लिए नेट पर स्वस्थ सामग्री व जीवनमूल्यों की शिक्षा हिन्दी में देने के प्रति प्रतिबद्ध है.ताकि नेट पर सर्फ़िंग करती हमारी भावी पीढ़ी को अपनी संस्कृति, साहित्य व मानवीयमूल्यों की समझ भी इस संसाधन के माध्यम से प्राप्त हो व वे केवल उत्पाती खेलों व उत्तेजक सामग्री तक ही सीमित न रहें.कोई भी इस अभियान का हिस्सा बन सकता है, जो भारतीय साहित्य से सम्बन्धित सामग्री को यूनिकोड में टंकित करके ‘बालसभा’ को उपलब्ध कराए। इसमें महापुरुषों की जीवनियाँ, कथा साहित्य व हमारा क्लासिक गद्य-पद्य सम्मिलित है ( जैसे पंचतंत्र, कथा सरित्सागर, हितोपदेश इत्यादि).

Thursday, June 19, 2008

खलील जिब्रान


खलील जिब्रान



सीरिया देश के माउण्‍ट लेबनान प्रान्‍त के बशीरी नामक नगर में एक कवि एवं चित्रकार का जन्‍म सन् 1883 में हुआ। लोग उसे लेबनान के अमरदूत के रूप में जानते हैं। वह कवि और कोई नहीं अपितु खलील जिब्रान के नाम से आज विश्‍वविख्‍यात है। लेबनान वह प्रान्‍त है जहां यहूदियों के अनेक पैगम्‍बर पैदा हो चुके हैं। और, खलील जिब्रान की रचनायें उसे महान युगद्रष्‍टा के रूप में प्रतिष्ठित करती हैं।


बारह वर्ष की उम्र में इस बालक ने पिता की उंगली पकड़ कर यूरोप की यात्रा की। लगभग दो वर्ष बाद वापस सीरिया पहुंच कर 'मदरसत-अल-हिकमत' नाम के एक प्रसिद्ध विद्यालय में इस बालक का पहला दाखिला कराया गया। विद्यार्थी जीवन के पश्‍चात् 1903 में वे अमेरिका गये और पांच वर्ष वहां रह कर फ्रांस पहुंचे। फ्रांस के नगर पेरिस में उन्‍होंने चित्रकला का अध्‍ययन किया। सन् 1912 में पुन: अमेरिका लौटकर मरणोपरान्‍त वे न्‍यूयार्क में ही रहे।


खलील जिब्रान ने सीरिया में रहकर अनेक पुस्‍तकें अरबी भाषा में लिखीं। सन् 1918 के आसपास उनका झुकाव अंग्रेजी में लेखन के प्रति हुआ। खलील जिब्रान की अपूर्व लेखनशैली और गहन विचारों ने अमेरिका, यूरोप और पूरे एशिया में जनमानस को प्रभावित किया। विश्‍व की तीस से अधिक भाषाओं में उनकी पुस्‍तकों का अनुवाद हुआ है। वे बीसवीं सदी के दांते कहे जाने लगे। अपनी पुस्‍तकों पर चित्रांकन खलील जिब्रान स्‍वयं किया करते थे। खलील जिब्रान के चित्रों का प्रदर्शन सभी देशों के प्राय: सभी मुख्‍य नगरों में हुआ। चित्रकला में उनकी तुलना अमेरिका के महान कलाकारों आगस्‍ट रोडिन और विलियम ब्‍लैक से की जाने लगी। एक बार आगस्‍ट रोडिन ने कवि जिब्रान से अपना चित्र बनवाने की इच्‍छा प्रकट की।


कवि एवं चित्रकार खलील जिब्रान यद्यपि आज इस संसार में नहीं हैं, दिनांक 10 अप्रैल 1931 को उनका देहावसान मात्र 48 वर्ष की आयु में हो गया, तथापि अपनी रचनाओं में वे सदैव अमर रहेंगे और विश्‍व को शान्ति, मनुष्‍यता और भाईचारे का संदेश सुनाते रहेंगे।
(प्रस्तुति सहयोग : आशीष दुबे )

3 comments:

yaksh said...

पठनीय,संग्रहणीय,सराहनीय सामग्री.....बधाई!

डॊ. कविता वाचक्नवी said...

यक्ष जी,
इन सराहना के शब्दों के लिए आभारी हूँ. सद्भाव बनाए रखें

ballu said...

I am very glad to inform you and your excellent effort for your site.
thanks

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आपका एक-एक सार्थक शब्द इस अभियान व प्रयास को बल देगा. मर्यादा व संतुलन, विवेक के पर्याय हैं और उनकी सराहना के शब्द मेरे पास नहीं हैं;पुनरपि उनका सत्कार करती हूँ|आपके प्रतिक्रिया करने के प्रति आभार व्यक्त करना मेरा नैतिक दायित्व ही नहीं अपितु प्रसन्नता का कारण भी है|पुन: स्वागत कर हर्ष होगा| आपकी प्रतिक्रियाएँ मेरे लिए महत्वपूर्ण हैं।

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