बुधवार, 25 जनवरी 2012
बुधवार, 9 नवंबर 2011
बिपिन चन्द्र पाल: "एक महान राष्ट्रवादी दिव्यद्रष्टा"
"बिपिन चंद्र पाल "

बुधवार, 27 जुलाई 2011
सूरज एक, चन्दा एक .....तारे भये अनेक ....
बुधवार, 29 जून 2011
बच्चों का सम्मान
शनिवार, 4 सितंबर 2010
है समय नदी की बाढ़ कि जिसमें सब बह जाया करते हैं
नेताजी सुभाषचन्द्र बोस
कवि श्री गोपालप्रसाद व्यास
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है समय नदी की बाढ़ कि जिसमें सब बह जाया करते हैं।
है समय बड़ा तूफ़ान प्रबल पर्वत झुक जाया करते हैं ।।
अक्सर दुनियाँ के लोग समय में चक्कर खाया करते हैं।
लेकिन कुछ ऐसे होते हैं, इतिहास बनाया करते हैं ।।
यह उसी वीर इतिहास-पुरुष की अनुपम अमर कहानी है।
जो रक्त कणों से लिखी गई, जिसकी जयहिन्द निशानी है।।
प्यारा सुभाष, नेता सुभाष, भारत-भू का उजियारा था ।
पैदा होते ही गणिकों ने जिसका भविष्य लिख डाला था।।
यह वीर चक्रवर्ती होगा, या त्यागी होगा सन्यासी।
जिसके गौरव को याद रखेंगे, युग युग तक भारतवासी।।
सो वही वीर नौकरशाही ने,पकड़ जेल में डाला था ।
पर क्रुद्ध केहरी कभी नहीं फंदे में टिकने वाला था।।
बाँधे जाते इंसान, कभी तूफ़ान न बाँधे जाते हैं।
काया ज़रूर बाँधी जाती, बाँधे न इरादे जाते हैं।।
वह दृढ़-प्रतिज्ञ सेनानी था, जो मौका पाकर निकल गया।
वह पारा था अंग्रेज़ों की मुट्ठी में आकर फिसल गया।।
जिस तरह धूर्त दुर्योधन से, बचकर यदुनन्दन आए थे।
जिस तरह शिवाजी ने मुग़लों के, पहरेदार छकाए थे ।।
बस उसी तरह यह तोड़ पींजरा, तोता-सा बेदाग़ गया।
जनवरी माह सन् इकतालिस,मच गया शोर वह भाग गया।।
वे कहाँ गए, वे कहाँ रहे, ये धूमिल अभी कहानी है।
हमने तो उसकी नयी कथा, आज़ाद फ़ौज से जानी है।।
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शनिवार, 7 अगस्त 2010
प्रकाश सूर्य से पृथ्वी तक कितने समय में और कैसे पहुँचता है?
शुक्रवार, 30 जुलाई 2010
आसमान में कितने तारे?
रविवार, 13 जून 2010
हम बच्चे मज़दूर के
चन्दा मामा दूर के
छिप-छिप कर खाते हैं हमसे
लड्डू मोती चूर के
लम्बी-मोटी मूँछें ऍंठे
सोने की कुर्सी पर बैठे
धूल-धूसरित लगते उनको
हम बच्चे मज़दूर के
चन्दा मामा दूर के।
बातें करते लम्बी-चौड़ी
कभी न देते फूटी कौड़ी
डाँट पिलाते रहते अक्सर
हमको बिना कसूर के
चन्दा मामा दूर के।
मंगलवार, 18 मई 2010
नीलमघाटी
नीलमघाटी
इस पर्वत के पार एक नीलमवाली घाटी है ,
*
आज चलो इस कोलाहल से दूर प्रकृति से मिलने
वन- फूलों के साथ खेलने और खुशी से खिलने
स्वच्छ वायु ,निर्मल जलधारा .हरे-भरे फूले वन ,
कलरव करते रंगरंग के पक्षी रूप सँवारे !
*
पशु-पक्षी ये जीव हमारी दुनिया के सहभागी ,
जो अधिकार हमें धरती पर वैसा ही उनका भी
बुद्धि मिली है सबके लिये विचार करें अपना सा
एक शर्त बस-जो भी आये मन में आदर धारे
*
परियाँ वहीं खेलने आतीं जहाँ प्यार बिखरा हो ,
धरती की सुन्दर रचना सम-भाव सभी को धारे
और शपथ लो यही कि इसमें माँ का रूप निहारें !
गुरुवार, 13 मई 2010
तन पुलकित मन प्रमुदित करती
शनिवार, 24 अप्रैल 2010
माँ ने मुझसे एक रोज़ कहा था
माँ ने मुझसे एक रोज़ कहा था
शुक्रवार, 16 अप्रैल 2010
बाल भारती निबंध प्रतियोगिता पुरस्कार
कार्यक्रम में अतिथियों का स्वागत प्रकाशन विभाग की अपर महानिदेशक श्रीमती वीना जैन ने किया। हर वर्ग और और भाषा-भाषी के लिए किफायती दरों पर पठनीय सामग्री उपलब्ध कराने के उद्देश्य के साथ प्रकाशन विभाग हर माह 13 भारतीय भाषाओं में राष्ट्रीय विकास को दर्शाती ‘योजना’ पत्रिका छापता है। इसके अलावा विभाग हिंदी और अंग्रेजी में ग्रामीण विकास की पत्रिका ‘कुरुक्षेत्र’, तथा हिंदी, और उर्दू में साहित्यिक पत्रिका ‘आजकल’ का प्रकाशन भी करता है।
शनिवार, 20 मार्च 2010
एक कविता आज गौरैया के नाम !
20 मार्च 2010 को पहली बार विश्व गौरैया दिवस World Sparrow Day मनाया जा मनाया जा रहा है |
एक कविता आज गौरैया के नाम !
बेचारी गौरैया एक
खम्भों के बीच पसरे
बिजली के तारों पर
सोच रही कहाँ जाऊँ, क्या करुँ
कितना और ढूँढती फिरूँ
सारे घर मंझा आई
घोंसला का जुगाड़
कहीं नहीं बना पाई
घर अब कहाँ रहे
धन्नी बाँस मोखले वाले
दीवारें खड़ीं सपाट
लोप हो गये कब के आले
रहती वह नहीं पेड़ पर
कभी घोंसला बना कर
झरोखों मोखलों में बसती
तिनके घास फूस जुटा कर
फालतू कतरन झाड झंखाड़
जहाँ पाती चोंच में दबाती
फुर्र से उड़ जाती
घोंसले में खोंस आती
कीड़े मकोड़े अनाज-दाने
जो कुछ पाती चबा जाती
कुछ चोंच में दबाये
चिचिहाते बच्चों के
मुँह में ठूँस आती
कभी वह गौरैया
खिड़की की चौखट
अलगनी मुंडेरों पर
आँगन में चौबारों में
कबाड़ के ढेरों पर
सदियों से चहक रही थी
नाचती कूदती झगडती
पूरे घर में बहक रही थी
बच्चे किलकारी भरते
टकटकी लगा तकते
चिरैया का सर्कस देख
रोना भी भूल जाते
वक्त ने पलटा खाया
आधुनिक इमारतों का
अनोखा जाल बिछाया
उजड़ गई गौरैया की दुनिया
फैशन ने कहर ढाया
आदमी के स्वार्थ से हार कर
पहुँच गई विलुप्ति की कगार पर
हमारी घरेलू चिरैया
बेचारी गौरैया !
मंगलवार, 29 दिसंबर 2009
हिमपात : कैलिफ़ोर्निया में टाहो झील के किनारे
मन में हैं खुशियाँ भर लाए।।
पाइन के हैं वृक्ष बड़े ।
सीधे हैं प्रहरी से खड़े।।
देखो झरती कैसे झर झऱ।
गिरती जाती बर्फ़ निरन्तर।।
बरस रही है सभी तरफ़।
दुग्ध-धवल सी दिखे बरफ़।।
आज हुआ कैसा हिमपात।
ढक गइ धरा, ढके तरुपात।।
ऐसा लगे शीत के भय से।
सूरज भी न निकला घर से।।
बादल की वह ओढ़ रज़ाई।
बिस्तर में छिप लेटा भाई।।
हैं मकान सब ढके बर्फ़ से।
बन्द रास्ते हुए बर्फ़ से ।।
देखो बाहर ज़रा निकलकर ।
चलो बर्फ़ में सँभल सँभल कर।।
बरफ़ थपेड़े दे गालों पर।
जूतों में गल जाए पिघलकर।।
ऊँचे कोमल बर्फ़ के गद्दे।
बिछे हुए हैं इस भू पर।।
मन करता है उन पर लोटें।
बच्चों के संग हिलमिल कर।।
बर्फ़ के लड्डू बना बना कर।
बालक खेलें खुश हो हो कर।।
मारें इक दूजे को हँस कर।
फिर भागें किलकारी भर कर।।
और कभी मन होता ऐसा।
बचपन में देखा था जैसा।।
बर्फ़ का चूरा हाथ में लेकर।
उस पर शर्बत लाल डाल कर।।
चुस्की लेकर उसको खाएँ।
घिसी बरफ़ का लुत्फ़ उठाएँ।।
दृश्य मनोरम बड़ा यहाँ है।
अपना मन खो गया यहाँ है।।
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शनिवार, 5 दिसंबर 2009
रोमांचकारी `मास्टरपीस' by ए. आर. रहमान
राष्ट्र–गान जन-गण-मन गाने के लिए नियम
भारत का राष्ट्र गान अनेक अवसरों पर बजाया या गाया जाता है। राष्ट्र गान के सही संस्करण के बारे में समय समय पर अनुदेश जारी किए गए हैं, इनमें वे अवसर जिन पर इसे बजाया या गाया जाना चाहिए और इन अवसरों पर उचित गौरव का पालन करने के लिए राष्ट्र गान को सम्मान देने की आवश्यकता के बारे में बताया जाता है। सामान्य सूचना और मार्गदर्शन के लिए इस सूचना पत्र में इन अनुदेशों का सारांश निहित किया गया है।
उपरोक्त राष्ट्र गान का पूर्ण संस्करण है और इसकी कुल अवधि लगभग 52 सेकंड है।
राष्ट्र गान की पहली और अंतिम पंक्तियों के साथ एक संक्षिप्त संस्करण भी कुछ विशिष्ट अवसरों पर बजाया जाता है। इसे इस प्रकार पढ़ा जाता है:
जन-गण-मन अधिनायक, जय हे
भारत-भाग्य-विधाता,
जय हे, जय हे, जय हे
जय जय जय जय हे।
संक्षिप्त संस्करण को चलाने की अवधि लगभग 20 सेकंड है।
जिन अवसरों पर इसका पूर्ण संस्करण या संक्षिप्त संस्करण चलाया जाए, उनकी जानकारी इन अनुदेशों में उपयुक्त स्थानों पर दी गई है।
राष्ट्र गान बजाना
1. राष्ट्र गान का पूर्ण संस्करण निम्नलिखित अवसरों पर बजाया जाएगा:
i. नागरिक और सैन्य अधिष्ठापन
ii. जब राष्ट्र सलामी देता है (अर्थात इसका अर्थ है राष्ट्रपति या संबंधित राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों के अंदर राज्यपाल/लेफ्टिनेंट गवर्नर को विशेष अवसरों पर राष्ट्र गान के साथ राष्ट्रीय सलामी - सलामी शस्त्र प्रस्तुत किया जाता है);
iii. परेड के दौरान - चाहे उपरोक्त (ii) में संदर्भित विशिष्ट अतिथि उपस्थित हों या नहीं;
iv. औपचारिक राज्य कार्यक्रमों और सरकार द्वारा आयोजित अन्य कार्यक्रमों में राष्ट्रपति के आगमन पर और सामूहिक कार्यक्रमों में तथा इन कार्यक्रमों से उनके वापस जाने के अवसर पर ;
v. ऑल इंडिया रेडियो पर राष्ट्रपति के राष्ट्र को संबोधन से तत्काल पूर्व और उसके पश्चात;
vi. राज्यपाल/लेफ्टिनेंट गवर्नर के उनके राज्य/संघ राज्य के अंदर औपचारिक राज्य कार्यक्रमों में आगमन पर तथा इन कार्यक्रमों से उनके वापस जाने के समय;
vii. जब राष्ट्रीय ध्वज को परेड में लाया जाए;
viii. जब रेजीमेंट के रंग प्रस्तुत किए जाते हैं;
ix. नौ सेना के रंगों को फहराने के लिए।
2. राष्ट्र गान का संक्षिप्त संस्करण मेस में सलामती की शुभकामना देते समय बजाया जाएगा।
3. राष्ट्र गान उन अन्य अवसरों पर बजाया जाएगा जिनके लिए भारत सरकार द्वारा विशेष आदेश जारी किए गए हैं।
4. आम तौर पर राष्ट्र गान प्रधानमंत्री के लिए नहीं बजाया जाएगा जबकि ऐसा विशेष अवसर हो सकते हैं जब इसे बजाया जाए।
5. जब राष्ट्र गान एक बैंड द्वारा बजाया जाता है तो राष्ट्र गान के पहले श्रोताओं की सहायता हेतु ड्रमों का एक क्रम बजाया जाएगा ताकि वे जान सकें कि अब राष्ट्र गान आरंभ होने वाला है। अन्यथा इसके कुछ विशेष संकेत होने चाहिए कि अब राष्ट्र गान को बजाना आरंभ होने वाला है। उदाहरण के लिए जब राष्ट्र गान बजाने से पहले एक विशेष प्रकार की धूमधाम की ध्वनि निकाली जाए या जब राष्ट्र गान के साथ सलामती की शुभकामनाएं भेजी जाएं या जब राष्ट्र गान गार्ड ऑफ ओनर द्वारा दी जाने वाली राष्ट्रीय सलामी का भाग हो। मार्चिंग ड्रिल के संदर्भ में रोल की अवधि धीमे मार्च में सात कदम होगी। यह रोल धीरे से आरंभ होगा, ध्वनि के तेज स्तर तक जितना अधिक संभव हो ऊंचा उठेगा और तब धीरे से मूल कोमलता तक कम हो जाएगा, किन्तु सातवीं बीट तक सुनाई देने योग्य बना रहेगा। तब राष्ट्र गान आरंभ करने से पहले एक बीट का विश्राम लिया जाएगा।
राष्ट्र गान को सामूहिक रूप से गाना
1. राष्ट्र गान का पूर्ण संस्करण निम्नलिखित अवसरों पर सामूहिक गान के साथ बजाया जाएगा:
i. राष्ट्रीय ध्वज को फहराने के अवसर पर, सांस्कृतिक अवसरों पर या परेड के अलावा अन्य समारोह पूर्ण कार्यक्रमों में। (इसकी व्यवस्था एक कॉयर या पर्याप्त आकार के, उपयुक्त रूप से स्थापित तरीके से की जा सकती है, जिसे बैंड आदि के साथ इसके गाने का समन्वय करने के लिए प्रशिक्षित किया जाएगा। इसमें पर्याप्त सार्वजनिक श्रव्य प्रणाली होगी ताकि कॉयर के साथ मिलकर विभिन्न अवसरों पर जनसमूह गा सके);
ii. सरकारी या सार्वजनिक कार्यक्रम में राष्ट्रपति के आगमन के अवसर पर (परंतु औपचारिक राज्य कार्यक्रमों और सामूहिक कार्यक्रमों के अलावा) और इन कार्यक्रमों से उनके विदा होने के तत्काल पहले।
2. राष्ट्र गान को गाने के सभी अवसरों पर सामूहिक गान के साथ इसके पूर्ण संस्करण का उच्चारण किया जाएगा।
3. राष्ट्र गान उन अवसरों पर गाया जाए, जो पूरी तरह से समारोह के रूप में न हो, तथापि इनका कुछ महत्व हो, जिसमें मंत्रियों आदि की उपस्थिति शामिल है। इन अवसरों पर राष्ट्र गान को गाने के साथ (संगीत वाद्यों के साथ या इनके बिना) सामूहिक रूप से गायन वांछित होता है।
4. यह संभव नहीं है कि अवसरों की कोई एक सूची दी जाए, जिन अवसरों पर राष्ट्र गान को गाना (बजाने से अलग) गाने की अनुमति दी जा सकती है। परन्तु सामूहिक गान के साथ राष्ट्र गान को गाने पर तब तक कोई आपत्ति नहीं है जब तक इसे मातृ भूमि को सलामी देते हुए आदर के साथ गाया जाए और इसकी उचित गरिमा को बनाए रखा जाए।
5. विद्यालयों में, दिन के कार्यों में राष्ट्र गान को सामूहिक रूप से गा कर आरंभ किया जा सकता है। विद्यालय के प्राधिकारियों को राष्ट्र गान के गायन को लोकप्रिय बनाने के लिए अपने कार्यक्रमों में पर्याप्त प्रावधान करने चाहिए तथा उन्हें छात्रों के बीच राष्ट्रीय ध्वज के प्रति सम्मान की भावना को प्रोत्साहन देना चाहिए।
सामान्य
2. जैसा कि राष्ट्र ध्वज को फहराने के मामले में होता है, यह लोगों की अच्छी भावना के लिए छोड दिया गया है कि वे राष्ट्र गान को गाते या बजाते समय किसी अनुचित गतिविधि में संलग्न नहीं हों।